न्यायालय में शंकराचार्यजी को किया दंडवत (डॉ राजेंद्रप्रसाद का संस्कृति प्रेम)

rajendra Bapu
सत्संग के मुख्य अंश :

* ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्यजी को अंग्रेजो ने झूठे आरोप में जेल भेज दिया था

* उनकी सुनवाई के लिए न्यायाधीश को जेल में सुनने की व्यवस्था हुई, न्यायाधीश तो पहुच गए पर शंकराचार्यजी ध्यान में बैठे थे तो किसी की हिम्मत नहीं हुई उन्हें उठाने की |

* न्यायाधीश आग-बबूला होकर चला गया और ३बजे आने को बोला..

* उस समय राजेंद्र प्रसाद जी वकील थे उन्होंने सोचा की क्या करें अपनी संस्कृति को बचाना है और वो २ मिनट शांत हो गए, प्रभु में शांत मन से अच्छी युक्ति आती है|

* जब ३ बजे कोर्ट लगा, जैसे ही शंकराचार्यजी दरवाजे के पास आये तो राजेंद्र प्रसाद जी अपनी टोपी उतार कर उनके चरणों में रख दी और दंडवत प्रणाम की मुद्रा में कुछ देर लेटे रहे फिर उन्होंने कहा- लाखो-लाखो लोगो की श्रद्धा और प्रार्थना आपके चरणों में, आप संतो के शान है, समस्त भारतवासियों का प्रणाम है |

* अंग्रेज न्यायाधीश यह देखकर पानी-पानी हो गया, लाखो-लाखो लोगो के ये श्रद्धेय है, इनको मुजरिम करार देना शासन के खिलाफ होगा और उसका मन बदल गया |

* जो अपने कर्तव्य में दृढ हैं और प्रतिदिन थोड़ा साधन-भजन करते हैं उनको युक्तियाँ भी सुन्दर आती है और संस्कृति की सेवा करके राजेंद्र बाबू विश्व विख्यात हो गए|