Raja Ahmed aur Jogi Maniknath ( Story Behind naming of Ahmedabad Gujrat )

raja ahmed
सत्संग के मुख्य अंश :

* अहमद राजा को कर्णावती नगर का जलवायु अच्छा लगा तो उसने वहां अहमदाबाद बसाने का विचार किया. तो पुराने ज़माने में गाँव या शहर के बाहर दीवार करते थे | पुराने अहमदाबाद कि दीवार को 12 दरवाजे थे, वो दरवाजे आज भी है दीवार हट गयी है | तो जिसको मानिक चौंक कहते है, वो मानिकनाथ जोगी का आश्रम था, तो उस आश्रम को ऐंठने के इरादे से अहमद ने आश्रम भी दीवार के अन्दर ले लिया |

* बाबा को हुआ कि अहमद क्या समझता है हमारी जमीन अपनी हद में ले ली | हजारों मजदूर दिन भर दीवार चुनें और बाबा दिन भर मंत्र करे और गोदड़ी सिये | शाम को बाबा मंत्र उल्टा बोले और धागा गोदड़ी में से निकाले और वहां दीवार गिर जाए | अहमद को समझ नहीं आये कि दिन भर दीवार बनी रहती है और रात को गिरती है पर कोई पकड़ में ना आये | आखिर एक हिन्दू मंत्री ने कहा कि यह बाबा की कुछ शक्ति है, मैं बाबा का चेला बन जाता हूँ और पता लगाता हूँ |

* उसने सारा खेल देखा और पूछा कि इन शक्तियों का नियंत्रण कहाँ है तो बाबा ने बताया कि अगर मैं प्रदर्शन करूंगा तो गुरु महाराज नाराज़ हो जायेंगे तो ये शक्तियां चली जाएँगी | उस मंत्री ने जाकर अहमद को बताया और अहमद आ गया | अहमद ने आकर बाबा की झूठी प्रशंसा की और बाबा वाहवाही में आ गए | बाबा ने कहा कि ये छोटे होने, बड़े होने जैसे हनुमान जी करते थे ये सब सिद्धियाँ मेरे पास है | बाबा एक दम छोटे बन गए और बोले कि मैं इस लोटे में भी जा सकता हूँ, और छोटे बने और जैसे ही लोटे में घुसे अहमद ने ढक्कन मार दिया |

* अब लोटे को गाड़ रहे थे तो बाबा ने कहा कि मैं तुम्हें श्राप दूंगा, तो अहमद ने कहा कि अब आपका श्राप मेरे को नहीं लगेगा क्यूंकि प्रदर्शन करने से शक्तियां चली गयी हैं | बाबा ने मन ही मन गुरु को पुकारा तो गुरु ने कहा कि बेटा यह अहमद कोई साधारण आदमी नहीं है, इसने अगले जन्म में प्रसिद्धि के लिए, सत्ता और राज्य पाने के लिए सत्संग करवाया है, तो तू अहमदाबाद बनने दे और इसको आशीर्वाद दे | तो बाबा ने कहा कि मैं तुझे आशीर्वाद देता हूँ कि यह कर्णावती नगर अहमदाबाद के नाम से खूब फैलेगा फूलेगा | अहमद ने कहा कि गुस्ताखी माफ़ करना बाबा मैं भी आपको क्यूँ लोटे में गाडूंगा |