रविवारी सप्तमी -14 सितम्बर

gurudkshina

 (शाम 6.40 से 15 सितम्बर सूर्योदय तक)

साधना में तीव्रता से आगे बढने के लिए :

पूज्य बापू जी ने कहा है की रविवारी सप्तमी  के दिन किया गया जप ध्यान अनंत गुना फलदायी होता है | जितना फल दीवाली ,जन्माष्टमी,होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल सोमवती अमावस्या के दिन भी करने से होता है |
साधना में उन्नति के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :

१: मौन का अधिक से अधिक सेवन करे या जितना कम संभव हो उतना कम बोले |

२: अधिक से अधिक समय जप और ध्यान में लगाये |

३: उपवास करे और सिर्फ दूध का सेवन करे (या नमक मिर्च बिना का भोजन करें ) |

४: रविवारी सप्तमी के दिन और उससे एक रात पहले भूमि पर शयन का करें |

५: रविवारी सप्तमी से एक रात्रि पहले साधकों को चाहिए की वो एक मजबूत संकल्प ले की मै कल मौन रखूँगा सद्ग्रंथो जैसे की जीवन रसायन ,इश्वर की ओर और दिव्य प्रेरणा प्रकाश का पठन करूँगा  और अपने आपको सतत जप और ध्यान में संलग्न रखूँगा |

 महत्वपूर्ण संकेत :
जो स्त्रियां अपने मासिक धर्म में हो वो इन सभी संकेतों को पालन करने से मुक्त है | परन्तु और सभी साधकों को ये नियम अवश्य पालन करना चाहिए |

About Asaram Bapuji

Asumal Sirumalani Harpalani, known as Asaram Bapu, Asharam Bapu, Bapuji, and Jogi by his followers, is a religious leader in India. Starting to come in the limelight in the early 1970s, he gradually established over 400 ashrams in India and abroad.