Sadguru Aur Shishya Ka Sambandh

shishya ka sambandh

उड़िया बाबाजी लिखते हैं -भगवान् में तो श्रद्धा हो जाती है, लेकिन हयात गुरु में श्रद्धा होना और टिके रहना बड़ा कठिन हैं ….

सब देवताओं की पूजा करने के बाद भी किसकिस की पूजा रहा जाती है, लेकिन जब सदगुरु मिल जाती है, तो सारी पूजा पूर्णविद हो जाती है …

गुरुर्ब्रह्म, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरा | गुरुर्रसाक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम:

जिसको नहीं देखा उसको माना … कमजोरों का काम नहीं, ये तो बलवान की पराकाष्ठा पर पहुँचे लोगों का ही काम है …  

सदगुरुओं में ऐसी अध्यात्मिक शक्ति होती है, की तुम्हारे जन्मों-जन्मों के पापों के पहाड़ों को वो हँसते-हँसते क्षण भर में नष्ट कर सकते हैं …