साधना में उत्साह और इमानदारी

तमस रजस और सत्व गुण

संसार की विद्या एक दिन नष्ट हो जाएगी

वशिष्ठ जी ने दिया भगवान राम को सत्संग

अपना कल्याण करो

ह्रदय से तमोगुण मिटाओ

भोग से मन को हटा दो

सब कुछ ब्रह्म स्वरूप

अपने चित्त को स्थिर करो

आत्मानंद के अलावा कोई भी सुख जीव को अंत में दुख देगा

निर्विकार नारायण के सुख में टिक जाओ

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