सरल है भक्ति

saralbhakti
सत्संग के मुख्य अंश :

* भक्ति पुरुषार्थी के लिए है और पुरुषार्थहीन के लिए भी है , जिसमे कोई अकाल नहीं है , कोई योग्यता नहीं है उसको भी भक्ति उठाती है और जो बड़ा पुरुषार्थ और बलवाला है उसके लिए भी भक्ति है ….

* जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा है जो होगा वो भी अच्छा होगा ये नियम पक्का है प्रभु का ऐसा भक्त मान ले प्रभु का , बस हो गई भक्ति …. सरल है भक्ति..