सेवा का मौक़ा

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मेरे गुरुदेव अस्सी वर्ष की आयु में भी किताबो की गठरी बांधकर नैनीताल की पहाड़ियों में जाते,सत्संग सुनाते,प्रसाद बाँटते और लोगो को एक एक किताब देते , उन्ही महापुरुष के निष्काम कर्मयोग का फल आज हम लोगो को मिल रहा है। मेरे साधक भी घर घर जाकर ऋषि-प्रसाद का दैवी कार्य करते हुए अपने देवत्व को जगाते है। आप लोगो को भी ऐसी सेवा का मौक़ा मिले तो चूकना नहीं।
-संत आशारामजी बापू