Three States of True Love Can be Seen between Pujya Bapuji & Dada Guru

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सच्चे प्रेम की तीन अवस्थाएँ

सत्संग के मुख्य अंश :

* प्रेम क्या है? ये कोई नही बता सकता है परन्तु प्रेम में क्या है, ये बता सकते हैं|

* प्रेम की तीन अवस्थाएँ होती है- पहली है पूर्व राग – मिले नही हैं आराध्य से और उनका चिंतन हो रहा है| दूसरी है मिलन – ये अनुभवगम्य है| इसका वर्णन नही हो सकता है| तीसरी है वियोग – ये तीन प्रकार के होते हैं| १) वर्तमान वियोग  २) भावी वियोग  ३) भूत वियोग

* जो लोग गुरु की और शास्त्र की बात मानते हैं उनके जीवन में मंजिल आ जाती है|

* केवल सद्गुणों के आधार पर ईश्वर का प्रेम नही मिलता है, पतित आदमी भी ईश्वर से प्रेम कार सकता है|

* ईश्वर केवल भक्तवत्सल ही नही हैं, वे तो अधमोध्दारक भी हैं|

* ईश्वर जिसे चाहें अपना प्रेम दे सकते हैं|

* गुरुदेव दीक्षा देते है तो पूछते नही हैं कि क्या पढ़े हो, बस दीक्षा दे देते हैं|

* ईश्वर की यदि भक्ति ना मिले तो भीतर दुःख होना चाहिए|