यमदूत

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एक व्यक्ति मिर्जापुर रोड, अहमदाबाद में रहता था। अहमदाबाद सिटी बस में नौकरी करता था। वह लाल जी महाराज का परिचित था। वह मृत्युशैया पर पड़ा तो लाल जी महाराज उसके यहाँ गये। वह आदमी खटिया पर पीड़ित होकर कई महीनों से पड़ा था। उसकी शैया के नजदीक वे पहुँचे ही थे कि वह बोल पड़ाः “महाराज ! आप मुझे मिलने आये, बहुत अच्छा किया। मगर मुझे ये यमदूत लेने आये हैं। देखो, ये खड़े हैं चारपाई की दायीं ओर।” महाराज वहाँ पहुँचे तो वह बोलता है कि ‘आप इधर आ गये तो वे बायीं ओर चले गये… अब सिरहाने आ गये…. अब पैरों की ओर आ गये….।

When Sant Kabir was framed in conspiracy of false allegations

आधा घंटे तक महाराज इधर-उधर होते रहे। आखिर वह बोलाः “अब तो वे चले गये।” उस व्यक्ति की अपमृत्य टल गयी, जैसे अजामिल की टल गयी थी।

जो इष्टमंत्र या गुरुमंत्र जपते हैं, जिनका इष्टमंत्र सिद्ध हो गया है, उनकी हाजिरी मात्र से अपमृत्यु टल सकती है, यमदूत भी भाग जाते हैं। जो मंत्रजप करते हैं वे केवल अपना ही कल्याण नहीं करते, जहाँ रहते हैं उस कुटुम्ब परिवार और वातावरण में भी कुछ अच्छा-भला होने लगता है।


एक ही सब, सब ही एक

लाल जी महाराज जिस दिन विद्यालय में गये उसी दिन वापस आ गये। स्लेट में एक का अंक लिखने के बाद दूसरा कोई अंक लिखने की उन्हें इच्छा ही नहीं हुई।

शिक्षकः “दूसरा भी कुछ लिखो।”

“दूसरा क्या है ? एक राम के सिवा दूसरा कुछ नहीं है।”

“और कुछ लिखो।”

“और कुछ नहीं है।”

विद्यालय में टिक न सके तो उन्हें घर की गाय-भैंस व बैलों को चराने ले जाने का काम मिला। दोपहर को खेत में सो जाते तो सपने में उन्हें अनेक विद्वान ब्राह्मण-समुदाय दर्शन देकर वेदमंत्रों के पाठ करवाते थे।


बचपन का भोलापन

लाल जी महाराज ने मुझसे कहा था कि “मैं बचपन में कितना भोला था। उस संदर्भ में आपको एक प्रसंग बताता हूँ। एक बार हमारे गाँव में महाभारत का एक नाटक दिखाया गया। उसे देखने गया तो अभिमन्यु को जब सारे राजाओं ने घेर लिया और तलवार से मारने लगे, तब मैं खड़ा होकर चिल्लाने लगा कि ‘मत मारो बेचारे को’ परंतु किसी ने नहीं सुना। फिर घर आकर मैं बहुत रोया।

माँ ने मुझे बहुत समझाया कि वह तो नाटक था, कोई नहीं मरा परंतु जब नाटक कम्पनी के लोगों से मिलकर आया और तसल्ली हुई तभी माना।